Saturday, 30 January 2016

मानव इतिहास का सब से महान योद्धा और विजेता...!!!

हमने बचपन में पढ़ा था मकदूनिया का अलेक्जेन्डर 20 साल की उम्र में बादशाह बना था, और 23 साल की उम्र में मकदूनिया से निकला, उसने सबसे पहले यूनान फतह किया, उसके बाद वह तुर्की में दाखिल हुआ, फिर ईरान के दारा को शिकस्त दी, फिर वह शाम पहुंचा, फिर उसने यरुशलम और बाबुल का रुख किया, फिर वह मिस्र पहुंचा और उसके बाद भारत आया, भारत में उसने पोरस से जंग लड़ी, अपने प्यारे घोड़े की याद में फालिया शहर आबाद किया, मकरान से होता हुआ वापसी का सफ़र आरम्भ किया. रास्ते में टाइफ़ाइड हो गया और ३२३ ईसा मसीह पूर्व ३३ साल की उम्र में बख्त नसर के महल में उसका देहान्त हो गया...। दुनिया को आज तक यही बताया गया है कि वह मानव इतिहास का सबसे महान योद्धा, विजेता और बादशाह था, और इतिहास ने उसके कारनामों की वजह से उसे अलेक्जेन्डर दी ग्रेट का नाम दे दिया, और हम ने उसे सिकन्दरे आज़म यानी बादशाहों का बादशाह बना दिया...।
लेकिन आज इक्कीसवीं शताबदी के इतिहासकारों के सामने मैं यह सवाल रखता हूँ “ की बताओ क्या हज़रत उमर बिन खत्ताब रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के होते हुए अलेक्ज़ेन्डर को सिकन्दरे आज़म कहलाने का हक़ हासिल है?

मैं दुनिया भर के इतिहासकारों को सिकंदरे आज़म और हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु की विजेताओं और कारनामों की तुलना करने की दावत देता हूँ, आप भी सोचिये:

अलेक्जेन्डर बादशाह का बेटा था, उसे विश्व के बेहतरीन लोगों ने घोड़सवारी सिखाई, उसे अरस्तु जैसे गुरु का साथ मिला और जब वह २० वर्ष का हो गया तो तख्त व ताज सोने की थाल में सजा कर पेश कर दिया गया। जबकि उसके मुक़ाबिले में हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु की ७ पुश्तों में कोई बादशाह नहीं गुज़रा था, आप भेड़, बकरियां और ऊँट चराते चराते बड़े हुए थे, आपने तलवार और तीर चलाना भी किसी अकेडमी से नहीं सिखा था.,
अलेक्जेन्डर ने आर्गनाइज़्ड आर्मी के साथ १० वर्षों में १७ लाख वर्ग मील का इलाक़ा जीता था, जब्कि हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु ने आर्गनाइज़्ड आर्मी के बगैर १० वर्षों में २२ लाख वर्ग का छेत्र जीता था, और उसमें रूम व ईरान की सुपर पवार शक्तियां भी थीं...। आजके सेटेलाईट, मिसाइल, परमाणु बम और पनडुब्बियों के दौर में भी दुनिया के किसी हुक्मरान के पास इतनी बड़ी हुकूमत नहीं है, जो हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु ने न सिर्फ यह कि घोड़ों की पीठ पर जिताया था, बल्कि उसका शासन भी बहुत ही कामयाबी के साथ चलाया था...।
अलेक्जेन्डर ने अपनी विजय के दौरान अनगिनत जरनलों को क़त्ल करवाया, अनगिनत कमांडरों और फौजी जवानों ने उसका साथ छोड़ा, उसके खिलाफ विद्रोह भी हुआ, भारत में उसकी फौजों ने आगे बढ़ने से इनकार भी कर दिया था, लेकिन हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु के किसी साथी को उनके हुक्म से इनकार की जुरअत ना हो सकी।
वह ऐसे कमान्डर थे कि उन्होंने ठीक मैदाने जंग में दुनियाए इस्लाम के सबसे बड़े सालार हजरत खालिद बिन वलीद (रजियल्लाहु अन्हु ) को निलंबित कर दिया और किसी को इस हुक्म के खिलाफ चूं करने की भी हिम्मत नहीं हुई। आपने हजरत साद बिन अबी वक्कास (रजियल्लाहु अन्हु) को कूफे की गवर्नरी से हटा दिया, हजरत हारिस बिन काब रजियल्लाहु अन्हु से गवर्नरी वापस ले ली, मिस्र के गवर्नर हजरत अम्र बिन आस रजियल्लाहु अन्हु का माल ज़ब्त कर लिया, और हमस के गवर्नर को वापस बुला कर मोटे ऊनी कपडे पहना कर ऊंट चरवाए; लेकिन किसी को भी इनकार की हिम्मत नहीं हुई।
अलेक्जेन्डर (सिकंदरे आज़म) ने १७ लाख वर्ग क्षेत्र पर विजय प्राप्त की मगर दुनिया को कोई सिस्टम न दे सका।जबकि हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु ने दुनिया को ऐसे सिस्टम दिये जो आज तक पूरी दुनिया में परचलित हैं।
सन: हिजरी साल की शुरुआत की।
जेल का ख़्याल दिया।
अज़ान देने वालों की तनखाहें मुक़र्रर कीं।
मस्जिदों में रोशनी का इन्तिज़ाम किया।
पुलिस का मुहकमा बनाया।
एक मुकम्मल न्यायिक वयवस्था की स्थापना की।
आपका न्याय इतना सच्चा और मिसाली था कि सच्चे न्याय को “फ़ारूकी न्याय” के नाम से जाना जाने लगा।
सिंचाई की वयवस्था की स्तापना की।
फौजी छावनियां बनवाईं, और फ़ौज का मुहकमा क़ायम किया।
आपने दुनिया में पहली बार दूध पीते बच्चों, माजूरों, बेवाओं, और बे असराओं के भत्ते जरी किए।
आपने दुनिया में पहली बार हुक्मरानों, सरकारी कारिन्दों और गवर्नरों की पूंजी डिक्लेयर करने का उसूल दिया।
आपने बेइन्साफी करने वाले जजों को सजा देने का परावधान भी शुरू किया।
आपने दुनिया में पहली बार आफिसर रैंक का उत्तरदायित्त्व तय किया।
आप रातों को तिजारती काफिलों की चौकीदारी करते थे।

आपके बारे में कुछ और जानकारी:

आपका कहना था की जो हुक्मरान न्याय करते हैं वह रातों को बेख़ौफ़ सोते हैं।
आपकी मुहर पर लिखा था “ उमर! नसीहत के लिए मौत ही काफी है”।
आपके दस्तरखान पर कभी दो सालन नहीं रखे गये।
आप ज़मीन पर सर के नीचे ईंट रख कर सो जाते थे। सफ़र में जहां कहीं नींद आती पेड़ पर चादर तान कर उसके नीचे नंगी ज़मीं पर लेट जाते।
आपके कुरते पर १४ पैवन्द थे, जिसमें से एक चमड़े का भी था।
आप मोटा खुरदुरा कपड़ा पहनते थे, नर्म व बारीक कपडे से नफरत थी।
आप जब भी किसी को सरकारी ओहदे पर तैनात करते, उसकी कुल पूंजी का आंकलन कर अपने पास लिख लेते, और भविष्य में जब कभी उसकी पूजी में बढ़ोतरी पाते तो उसका हिसाब मांगते।
आप जब किसी को गवर्नर बनाते तो उसे नसीहत करते: “ कभी तुर्की घोड़े पर मत बैठना, बारीक कपड़े मत पहनना, छना हुआ आटा ना खाना, दरबान ना रखना, और किसी फर्यादी पर दरवाज़ा बंद ना करना।
आप फरमाते: ज़ालिम को मआफ़ कर देना मजलूमों पर ज़ुल्म है।
आपका यह जुमला आज भी मानवीय अधिकारों के छेत्र में चार्टर की हैसियत रखता है: “मायें बच्चो को आज़ाद पैदा करती हैं, तुमने उन्हें कबसे गुलाम बना लिया”।
आप कहते, “मैं अक्सर सोचता हूं की उमर कैसे बदल गया”।
शहादत के वक़्त आप पर क़र्ज़ था, आपकी वसियत के मुताबिक़ आपका अकेला घर बेच कर उसे अदा किया गया।
आप दुनिया के अकेले ऐसे हाकिम थे जो कहा करते कि: “मेरे दौर में अगर दरया-ये-फुरात के किनारे कोई कुत्ता भी भूक से मर गया तो उसकी सजा उमर को भुगतना होगी”।
आपके अदल-व-इन्साफ की यह हालत थी कि आपका इन्तिकाल हुआ तो मुल्क के एक दूर के इलाक़े का एक चरवाहा भागता हुआ मदीने पहुंचा और चिल्लाते हुए बोला: लोगो हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु का इन्तिकाल हो गया...। लोगों ने हैरत से पूछा: तुम मदीना से हजारों मील दूर जंगल में रहते हो, तुम्हें इस हादसे की खबर किसने दी? चरवाहा जवाब में बोला: जब तक हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु जिंदा थे मेरी भेड़ें जंगल में बेख़ौफ़ फिरती थीं और कोई दरिंदा उनकी तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखता था लेकिन आज पहली बार एक भेड़िया मेरी भेड़ का बच्चा उठाकर ले गया, मैंने भेड़िये की हिम्मत से जान लिया की हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु अब इस दुनिया में नहीं रहे...।”

मैं दुनिया भर के इतिहासकारों को दावत देता हूँ, वह सिकंदर ए आज़म कहलाने वाले अलेक्जेंडर को हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के सामने रख कर देखें उन्हें सिकंदर हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु की तुलना में पहाड़ के सामने कन्कर दिखाई देगा...।
अलेक्जेंन्डर की बनाई सलतनत उसकी मौत के ५ वर्ष बाद ही ख़त्म हो गई, जबकि हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने अपने ज़माने में जिस जिस क्षेत्र में इस्लाम का झन्डा भिजवाया, वहां आज भी अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर की बांग सुनाई देती है...। वहां आज भी लोग अल्लाह के सामने सजदा करते हैं।
विश्व में अलेक्जेन्डर का नाम सिर्फ किताबों में सिमट कर रह गया है, जबकि हजरत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की बनाई हुई शासन व्यवस्था आज भी दुनिया के २४५ देशों में किसी न किसी शक्ल में मौजूद है...।
आज भी किसी डाक खाने से जब कोई ख़त निकलता है, पुलिस का कोई सिपाही वरदी पहनता है, कोई फौजी जवान ६ माह बाद छुट्टी पर घर जाता है, या फिर हुकूमत किसी बच्चे, माज़ूर, बेवा, या किसी बे आसरा को वजीफा देती है तो वह बे इख्तियार हज़रत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को अज़ीम तसलीम करती है...। वह उन्हें इतिहास का सबसे बड़ा सिकंदर मान लेती है, सिवाये उन मुसलमानों के जो आज सख्त हीनता (Inferiority Complex) के कारण कलमा तक पढ़ने से पहले दायें बायें देखते हैं...।

लाहौर के मुसलमानों ने एक बार अंग्रेज़ सरकार को धमकी दी थी: “अगर हम घरों से निकल पड़े तो तुम्हें चन्गेज़ खान याद आ जायेगा...।”
उसपर जवाहर लाल नेहरु ने मुसकुरा कर कहा था “अफ़सोस आज चन्गेज़ खान की धमकी देने वाले मुसलमान यह भूल गये की उनकी तारीख़ में एक हज़रत उमर फ़ारूक़ ए आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु भी थे”. जिनके बारे में यूरोपियन स्कालर मानते हैं कि “इस्लाम में अगर एक उमर और होते तो आज दुनिया में सिर्फ़ इस्लाम दीन ही होता...।”

पढ़ो, सोचो, और न्यायसंगत विचार करो : कौन है मानव इतिहास का सब से महान योद्धा और विजेता...!!!

Monday, 1 April 2013

9th Century (800-899) C.E.


800:
The Aghlabid rule is established in North Africa.
803:
Downfall of the Barmakids. Execution of Jafar Barmki.
805:
Campaigns against the Byzantines. Capture of the islands of Rhodes and Cypress.
809:
Death of Harun ur Rashid. Accession of Amin.
814:
Civil war between Amin and Mamun. Amin killed and Mamun becomes the Caliph.
815:
Shia revolt under Ibn Tuba Tabs.
816:
Shia revolt in Makkah; Harsama quells the revolt. In Spain the Umayyads capture the island of Corsica.
817:
Harsama killed.
818:
The Umayyads of Spain capture the islands of Izira, Majorica, and Sardinia.
819:
Mamun comes to Baghdad.
820:
Tahir establishes the rule of the Tahirids in Khurasan.
822:
Death of Al Hakam in Spain; accession of Abdul Rahman. II.
823:
Death of Tahir in Khurasan. Accession of Talha and his deposition. Accession of Abdullah b Tahir.
827:
Mamun declares the Mutazila creed as the state religion.
833:
Death of Mamun. Accession of Mutasim.
836:
Mutasim shifts the capital to Samarra.
837:
Revolt of the Jats.
838:
Revolt of Babek in Azarbaijan suppressed.
839:
Revolt of Maziar in Tabaristan. The Muslims occupy South Italy. Capture of the city of Messina in Sicily.
842:
Death of Mutasim, accession of Wasiq.
843:
Revolts of the Arabs.
847:
Death of Wasiq, accession of Mutawakkil.
850:
Mutawakkil restores orthodoxy.
849:
Death of the Tahirid ruler Abdullah b Tahir; accession of Tahir II.
852:
Death of Abdur Rahman II of Spain;. accession of Muhammad I.
856:
Umar b Abdul Aziz founds the Habbarid rule in Sind.
858:
Mutawakkil founds the town of Jafariya.
860:
Ahmad founds the Samanid rule in Transoxiana.
861:
Murder of the Abbasid Caliph Mutawakkil; accession of Muntasir.
862:
Muntasir poisoned to death; accession of Mutasin.
864:
Zaidi state established in Tabaristan by Hasan b Zaid.
866:
Mutasim flies from Samarra, his depostion and accession of Mutaaz.
867:
Yaqub b Layth founds the Saffarid rule in Sistan.
868:
Ahmad b Tulun founds the Tulunid rule in Egypt.
869:
The Abbasid Caliph Mutaaz forced to abdicate, his death and accession of Muhtadi.
870:
Turks revolt against Muhtadi, his death and accession of Mutamid.
873:
Tahirid rule extinguished.
874:
Zanj revolt in South Iraq. Death of the Samanid ruler Ahmad, accession of Nasr.
877:
Death of Yaqubb Layth in Sistan, accession of Amr b Layth.
885:
Death of Ahmad b Tulun in Egypt, accession of Khamar- wiyiah.
866:
Death of Muhammad I the Umayyad ruler of Spain, accession of Munzir. Death of Abdullah b Umar the Habbari ruler of Sind.
888:
Death of Munzir the Umayyad ruler of Spain, accession of Abbullah.
891:
The Qarmatian state established at Bahrain.
892:
Death of the Samanid ruler Nasr, accession of Ismail.
894:
The Rustamids become the vassals of Spain.
896:
Death of the Tulunid ruler Khamarwiyiah; accession of Abul Asakir Jaish.
897:
Assassination of Abul Asakir Jaish; accession of Abu Musa Harun.
898:
Qarmatians sack Basra.

Thursday, 2 July 2009

Muslim History 8th Century (700 - 799) C.E

700: Campaigns against the Berbers in North Africa.
702: Ashath's rebellion in Iraq, battle of Deir ul Jamira.
705: Death of Abdul Malik. Accession of Walid I as Caliph.
711: Conquest of Spain, Sind and Transoxiana.
712:The Muslims advance in Spain, Sind and Transoxiana.
713:Conquest of Multan.
715:Death of Walid I. Accession of Sulaiman.
716:Invasion of Constantinople.
717:Death of Sulaiman. Accession of Umar b Abdul Aziz.
720: Death of Umar b Abdul Aziz. Accession of Yazid II.
724: Death of Yazid II. Accession of Hisham.
725: The Muslims occupy Nimes in France.
732: The battle of Tours in France.
737: The Muslims meet reverse at Avignon in France.
740:Shia revolt under Zaid b Ali. Berber revolt in North Africa. Battle of the Nobles.
741: Battle of Bagdoura in North Africa.
742: The Muslim rule restored in Qiarowan.
743: Death of Hisham. Accession of Walid II. Shia revolt in Khurasan under Yahya b Zaid.
744:Deposition of Walid I1. Accession of Yazid II1 and his death. Accession of Ibrahim and his overthrow. Battle of Ain al Jurr. Accession of Marwan II.
745: Kufa and Mosul occupied by the Khawarjites.
746: Battle of Rupar Thutha, Kufa and Mosul occupied by Marwan II.
747: Revolt of Abu Muslim in Khurasan.
748:Battle of Rayy.
749: Battles of lsfahan and Nihawand. Capture of Kufa by the Abbasids. As Saffah becomes the Abbasid Caliph at Kufa.
750: Battle of Zab. Fall of Damascus. End of the Umayyads.
751: Conquest of Wasit by the Abbasid. Murder of the Minister Abu Salama.
754: Death of As Saffah. Accession of Mansur as the Caliph.
755: Revolt of Abdullah b Ali. MUrder of Abu Muslim. Sunbadh revolt in Khurasan.
756: Abdul Rahman founds the Umayyad state in Spain.
762: Shia revolt under Muhammad (Nafs uz Zakia) and Ibrahim.
763: Foundation of Baghdad. Defeat of the Abbasids in Spain.
767: Khariji state set up by Ibn Madrar at Sijilmasa. Ustad Sees revolt in Khurasan.
772: Battle of Janbi in North Africa. Rustamid. state set up in Morocco.
775: Death or the Abbasid Caliph Mansur, Accession of Mahdi.
777: Battle of Saragossa in Spain.
785:Death of the Caliph Mahdi. Accession of Hadi.
786: Death of Hadi. Accession of Harun ur Rashid.
788: Idrisid state set up in the Maghrib. Death of Abdul Rahman of Spain, and accession of Hisham.
792: Invasion of South France.
796: Death of Hisham in Spain; accession of al Hakam.
799: Suppression of the revolt of the Khazars. Ninth century.

Saturday, 6 June 2009